• gauri nadkarni choudhary

A tribute to Gulzar


उस चांद को देखो,

वो सिर्फ रात में दिखता है।

उस चांद को देखो,

जो चमकता है पर जलाता नहीं।

उस चांद को देखो,

जो अस्त होता है पर खोता नहीं।

उस चांद को देखो,

जो प्रेम का प्रतीक है पर चलता अकेला है।

उस चांद को देखो,

जो पूरा है पर धरती से झुक कर मिलता है।

उस चांद को देखो,

ये सिर्फ अंधेरे में दिखता है।

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